कोर्स – 10 : बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु विद्यालय नेतृत्व

कोर्स – 10

बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु विद्यालय नेतृत्व

परिचय :

बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु विद्यालय नेतृत्व विकास का दृष्टिकोण विद्यालय प्रमुखों व शिक्षकों के लिए की गई है। ताकि शाला प्रमुख व शिक्षक को नेतृत्व कर्ताओं के रूप में विकसित कर सकें।

उद्देश :

  • कोर्स पूर्ण करने के बाद हम सक्षम होंगे-
  • 3 – 9 वर्ष के बच्चों के बीच FLN को सुदृढ़ व नेतृत्व प्रदान करने के लिए ज्ञान ,कौशल को प्राप्त करने में।
  • बच्चों की शिक्षा के प्रारंभिक चरण के निर्माण में मदद करने के लिए समुदाय और अभिभावकों के साथ संपर्क स्थापित करने में।
  • शिक्षकों की क्षमताओं को बढ़ाने और दृष्टिकोण में बदलाव तथा प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थी अधिगम में सुधार हेतु शिक्षा शास्त्रीय नेतृत्व पर एक समझ विकसित करने में।

कोर्स की रूपरेखा :

बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान की अगुवाई हेतु विद्यालय नेतृत्व पर दृष्टिकोण बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को सुदृढ़ बनाने बनाने हेतु शिक्षा शास्त्रीय नेतृत्व विशिष्ट विद्यालय विकास योजना की तैयारी।
प्रभावी विद्यालय समुदाय संबंध बनाने के लिए सबल साझेदारी का विकास FLN का शाला प्रमुखों द्वारा क्रियान्वयन

विद्यालय नेतृत्व का परिचय :

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में FLN पर काफी जोर दिया गया है एवं 3 – 8 वर्ष की आयु वर्ग को बुनियादी चरण के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।
यह नीति कक्षा 3 में प्रवेश करने से पूर्व ही बच्चे पढ़ने और लिखने में निपुण एवं सक्षम हो जाएं, इस परिकल्पना पर आधारित है।
निपुण भारत नेशनल अंडर ट्रैकिंग एंड न्यूमैरेसी मिशन के द्वारा 9 वर्ष की आयु तक को मूलभूत या बुनियादी चरण के रूप में जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है कि निष्ठा में बुनियादी साक्षरता व संख्यात्मकता की दृष्टिकोण से 3 – 9 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे शामिल हैं।

विद्यालय नेतृत्व पर एक दृष्टिकोण का निर्माण :

FLN को ” कौशलों का प्रवेश द्वार ” यानि गेटवे स्किल माना जाता है क्योंकि यह औपचारिक विद्यालयी शिक्षा प्रक्रियाओं में बच्चे के प्रवेश को चिन्हित करता है।

विद्यालय नेतृत्व विकास पर मॉडल :

शाला स्तर पर शैक्षणिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं पर नेतृत्वकर्ता को नेतृत्व पर ज्ञान कौशल व अभिवृत्ति के संदर्भ में अपनी योग्यता का निर्माण करने की जरूरत है।
FLN के सफल क्रियान्वयन के लिए शाला नेतृत्व करने की चार मॉडल है।

1. संदर्भ विशिष्ट नेतृत्व
नेतृत्व करता को चाहिए कि वह छात्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक संदर्भ की समझ रखें साथ ही भौगोलिक , पारिवारिक पृष्ठभूमि भी अच्छे से समझे। उस क्षेत्र की स्थानीय भाषा भी जाने।

2. अनुकूलन नेतृत्व
FLN के संदर्भ में एक नेतृत्वकर्ता की जिम्मेदारी होगी कि वह स्वयं को और शिक्षकों को आने वाली चुनौतियों के अनुकूल बनाएं।

3. सहयोगात्मक नेतृत्व
एक नेतृत्वकर्ता को चाहिए कि वह कामों का बंटवारा करें, विजन निर्माण करें, प्रभावी शिक्षण हेतु प्रोत्साहन करें ,शिक्षकों का क्षमता विकास करें।

4. परिवर्तनकारी नेतृत्व
यह वह प्रक्रिया है जिसमें नेतृत्वकर्ता दूसरों के साथ जुड़ता है और एक संबंध बनाता है ताकि नेतृत्व करता और उसके सहयोगी यों दोनों की प्रेरणा और पेशेवर नैतिकता में वृद्धि हो।

शिक्षा शास्त्रीय नेतृत्व करता कौन है?
शिक्षा शास्त्री नेतृत्वकर्ता, एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास विभिन्न विषयों का अनुशासन का उपयुक्त ज्ञान, कौशल होता है। बच्चों के सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार करना एवं लर्निंग आउटकम्स प्राप्त करने में मदद करना , ये शिक्षा शास्त्रीय नेतृत्व करता का उद्देश्य है।

शाला में FLN केवल चाॅक और टॉक पर आधारित ना रहे इसमें गतिविधि आधारित सीखने व प्रयोग से प्राप्त अनुभव पर केंद्रित है।
3 – 9 वर्ष की आयु के बच्चों के सीखने सिखाने के लिए कुछ विजन है।
1. विषय आधारित थीम बेस्ड
2. परियोजना है या पूछताछ आधारित
3. खिलौना आधारित
4. गतिविधि आधारित
5. खेल आधारित
6 .कला खेल/ एकीकृत
7. कथा वाचन
8. आईसीटी एकीकृत अधिगम

अन्वेषण बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु शिक्षा शास्त्रीय नेतृत्व पर रूपरेखा अन्वेषण की जानकारी कुछ इस प्रकार से है-


शाला प्रमुखों द्वारा परिवार एवं समुदाय को कैसे संलग्न करें?
बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान का संबंध 6-9वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के कौशल विकास से है ,यह एक सर्वविदित तथ्य है कि इतनी कम उम्र में बच्चा अपनी मां / पालक / परिवार के करीब होता है । इसलिए FLN के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पालक/ समुदाय के सदस्यों को शामिल कर भागीदारी को सुनिश्चित कराना है जिसके कुछ तरीके निम्न है-

1. पालन पोषण
एक सुरक्षित व सीखने का घर जैसा माहौल देना एवं सहभागिता, समर्थन, संवाद करना

2. संचार
बच्चों की प्रगति की चर्चा के लिए संपर्क करें , वार्ता करें, ग्रुप (Whatsapp Group) बनाएं डायरी में टिप्पणी दें।

3. स्वयं सेवा
समुदाय के स्वयंसेवी बच्चे कौशल धारी जनों को अपने अनुभव साझा करने का मौका दें, आभार व्यक्त करें।

4. घर पर सीखना
बच्चों के सीखने में पालकों का मार्गदर्शन करें ,शाला में संसाधन कक्ष का एवं गतिविधियों का , प्रिंट रिच वातावरण का उपयोग करना सिखा कर पालकों को घर में सीखने – सिखाने की जानकारी दें।

5. निर्णय लेना
बालकों को एक कुशल नेतृत्व कर्ता के रूप में विकसित करके शाला के निर्णय, संचालन में भागीदारी बनाना, इसके लिए साला में बैठक कराएं।

6. समुदाय के साथ सहयोग
शाला के कार्यक्रमों, पारिवारिक प्रथाओं वह बच्चों के सीखने का समर्थन करने के लिए समुदाय से संसाधनों व सेवाओं का समन्वय करना।

शाला विकास योजना तैयार करना

असाइनमेंट :

इस कोर्स को पढ़ने के बाद अन्य विधायकों के साथ नेतृत्वकर्ता प्रत्येक घटक, विषय वस्तु के लिए स्पष्ट कार्य बिंदुओं को समाहित करते हुए एफ. एल. एन. के लिए अपनी योजना के क्रियान्वयन के लिए एक रूपरेखा तैयार करें।

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